🌸 1. गुरु नानक देव जी (1469–1539)

- जन्म: 15 अप्रैल 1469, तलवंडी (अब ननकाना साहिब, पाकिस्तान)
- माता-पिता: पिता – मेहता कालू जी, माता – माता तृप्ता देवी जी
- पत्नी: माता सुलखनी जी
- संतान:
- पुत्र 1️⃣ – बाबा श्रीचंद जी ( महान तपस्वी, उदासीन परंपरा के प्रणेता

- पुत्र 2️⃣ –बाबा लखमीदास जी
- गुरु गद्दी: 1469 – 1539
- ज्योतिजोत दिवस: 22 सितंबर 1539, करतारपुर साहिब (वर्तमान मे पाकिस्तान)
- मुख्य कार्य: सिख धर्म की स्थापना, “एक ओंकार सतनाम” का प्रचार, निर्गुण भक्ति परंपरा के संत, जाति-पाति और मूर्तिपूजा का विरोध, लंगर परंपरा की शुरुआत।
🌸 2. गुरु अंगद देव जी (1504–1552)

- जन्म: 31 मार्च 1504, हरीके गाँव, फिरोजपुर (पंजाब)
- माता-पिता: पिता – फेरू मल जी, माता – रामो जी
- पत्नी: माता खीवी जी
- संतान:
- पुत्र 1️⃣ – बाबा दसू जी
- पुत्र 2️⃣ – बाबा दातू जी
- पुत्री 1️⃣ – बीबी अमरो जी
- पुत्री 2️⃣ – बीबी अनोखी जी
- गुरु गद्दी: 1539 – 1552
- ज्योतिजोत दिवस: 29 मार्च 1552
- मुख्य कार्य: गुरुमुखी लिपि का प्रचार, शिक्षा और खेलों को बढ़ावा, लंगर सेवा को संगठित किया।
🌸 3. गुरु अमरदास जी (1479–1574)

- जन्म: 5 मई 1479, बसरके गाँव, अमृतसर
- माता-पिता: पिता – तेजभान जी, माता – लक्ष्मी देवी जी ( माता भगत कौर जी, माता सुलखनी जी इनके अन्य नाम हैं)
- पत्नी: माता मनसा देवी जी
- संतान:
- पुत्र 1️⃣ –बाबा मोहन जी
- पुत्र 2️⃣ –बाबा मोहरी जी
- पुत्री 1️⃣ – बीबी दानी जी
- पुत्री 2️⃣ – बीबी भानी जी (गुरु रामदास जी की पत्नी)
- गुरु गद्दी: 1552 – 1574
- ज्योतिजोत दिवस: 1 सितंबर 1574
- मुख्य कार्य: लंगर को अनिवार्य बनाया, स्त्रियों को समान अधिकार, ‘मनजी प्रणाली’ का आरंभ।
🌸 4. गुरु रामदास जी (1534–1581)

- जन्म: 24 सितंबर 1534, लाहौर (पाकिस्तान)
- माता-पिता: पिता – हरिदास सोढ़ी जी, माता – दया कौर जी (माता अनूप कौर जी)
- पत्नी: बीबी भानी जी (गुरु अमरदास जी की पुत्री)
- संतान:
- पुत्र 1️⃣ – बाबा पृथी चंद
- पुत्र 2️⃣ – बाबा महादेव
- पुत्र 3️⃣ – अर्जन देव जी(पाँचवें गुरु)
- गुरु गद्दी: 1574 – 1581
- ज्योतिजोत दिवस: 1 सितंबर 1581
- मुख्य कार्य: अमृतसर नगर की स्थापना, हरमंदिर साहिब का निर्माण प्रारंभ करवाया।

🌸 5. गुरु अर्जन देव जी (1563–1606)

- जन्म: 15 अप्रैल 1563, गोइंदवाल साहिब
- माता-पिता: पिता – गुरु रामदास जी, माता – बीबी भानी जी
- पत्नी: माता गंगा जी
- संतान:
- पुत्र 1️⃣ – हरगोविंद जी (छठे गुरु)
- गुरु गद्दी: 1581 – 1606
- शहीदी दिवस: 30 मई 1606, लाहौर
- मुख्य कार्य: आदि ग्रंथ साहिब का संकलन, हरमंदिर साहिब का निर्माण पूर्ण किया, सिख धर्म को संगठित किया।

🌸 6. गुरु हरगोविंद साहिब जी (1595–1644)

- जन्म: 19 जून 1595, गोइंदवाल
- माता-पिता: पिता – गुरु अर्जन देव जी, माता – बीबी गंगा जी
- पत्नी:
- माता दामोदेरी जी
- माता नानकी जी
- माता मरवाहि जी
- संतान:
- पुत्र –बाबा गुरदित्त,जी,
- बाबा सुरजमल जी,
- बाबा अनी राय जी
- बाबा अटल राय जी,
- त्यागमल जी या तेग बहादुर जी(9वें गुरु),
- पुत्री – बीबी वीरो जी
- गुरु गद्दी: 1606 – 1644
- ज्योतिजोत दिवस: 3 मार्च 1644
- मुख्य कार्य: मीरी–पीरी ( संत- योद्धा) की परंपरा, अकाल तख्त की स्थापना, सिखों को शस्त्रधारण का आदेश।
🌸 7. गुरु हर राय जी (1630–1661)

- जन्म: 16 जनवरी 1630, कीरतपुर साहिब
- माता-पिता: पिता – बाबा गुर दित्ता जी, माता – निहाल कौर
- पत्नी: माता कोट कल्याणी ( कृष्णा देवी / किशन कौर) जी
- संतान:
- पुत्र 1️⃣ – बाबा राम राय जी
- पुत्र 2️⃣ – हरकिशन जी (8वें गुरु)
- पुत्री 1️⃣ बीबी रूप कौर जी
- गुरु गद्दी: 1644 – 1661
- ज्योतिजोत दिवस: 6 अक्टूबर 1661
- मुख्य कार्य: औषधालय की स्थापना, गरीबों की सेवा, पर्यावरण प्रेम और करुणा का संदेश।
🌸 8. गुरु हरकिशन जी (1656–1664)

- जन्म: 7 जुलाई 1656, कीरतपुर साहिब
- माता-पिता: पिता – गुरु हर राय जी, माता – किशन कौर जी (माता सुलखनी जी)
- पत्नी: अविवाहित
- संतान: नहीं
- गुरु गद्दी: 1661 – 1664
- ज्योतिजोत दिवस: 30 मार्च 1664, दिल्ली
- मुख्य कार्य: दिल्ली मे चेचक महामारी के समय लोगों की चंगा करते हुए सारी बीमारी खुद पर लेकर ज्योतिजोत समाए ,“बाला पीर या बाला प्रीतम” कहलाए। बंगला साहिब गुरुद्वारा इन्ही की यादगार है|

🌸 9. गुरु तेग बहादुर जी (1621–1675)

- जन्म: 1 अप्रैल 1621, अमृतसर
- माता-पिता: पिता – गुरु हरगोविंद जी, माता – नानकी जी
- पत्नी: माता गुजरी जी
- संतान:
- पुत्र 1️⃣ – गोबिंद राय (गुरु गोबिंद सिंह जी – 10वें गुरु)
- गुरु गद्दी: 1664 – 1675
- निधन: 11 नवंबर 1675, दिल्ली (शहीद)
- मुख्य कार्य: कश्मीरी पंडितों के आग्रह् पर हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शीश बलिदान, आनंदपुर साहिब की स्थापना, धार्मिक स्वतंत्रता के रक्षक। हिंद की चादर नाम से विख्यात|

🌸 10. गुरु गोबिंद सिंह जी (1666–1708)

- जन्म: 22 दिसंबर 1666, पटना साहिब (बिहार)
- माता-पिता: पिता – गुरु तेग बहादुर जी, माता – माता गुजरी जी
- पत्नी:
- माता जीतो जी
- माता सुंदरी जी
- माता साहिब कौर जी
- संतान:
- चार पुत्र – बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह (सभी शहीद हुए)
- गुरु गद्दी: 1675 – 1708
- निधन: 7 अक्टूबर 1708, नांदेड़ (महाराष्ट्र)
- मुख्य कार्य: खालसा पंथ की स्थापना (1699), पंच ककार की परंपरा, गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन और अंतिम गुरु घोषित किया, धर्म की रक्षा हेतु चारों पुत्रों सहित संपूर्ण वंश का बलिदान दिया।

🔱 सारांश रूप में मुख्य कार्य
| गुरु | प्रमुख कार्य |
|---|---|
| गुरु नानक देव | सिख धर्म की स्थापना, “एक ओंकार” का प्रचार |
| गुरु अंगद देव | गुरुमुखी लिपि का विकास |
| गुरु अमरदास | स्त्रियों को समान अधिकार, लंगर व्यवस्था |
| गुरु रामदास | अमृतसर की स्थापना |
| गुरु अर्जन देव | आदि ग्रंथ का संकलन, हरमंदिर साहिब निर्माण |
| गुरु हरगोविंद | मीरी-पीरी परंपरा, अकाल तख्त की स्थापना |
| गुरु हर राय | औषधालय और सेवा भावना |
| गुरु हरकिशन | महामारी में सेवा, “बाला पीर” |
| गुरु तेग बहादुर | धार्मिक स्वतंत्रता हेतु बलिदान |
| गुरु गोबिंद सिंह | खालसा पंथ की स्थापना, गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु घोषित किया |
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