कक्षा 12 राजनीतिक विज्ञान का प्रेक्टिस पेपर (अभ्यास प्रश्नपत्र), Class 12 Political Science Practice Paper 2025 |

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Fully SolvedComplete solved practice paper for Class 12 Political Science with MCQs, PYQs, long answers and solutions

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खंड–क (12×1 = 12 अंक)


Q1. शीत युद्ध की समाप्ति का एक प्रमुख परिणाम _____ था।

विकल्प:
अ) द्विध्रुवीयता का उदय
ब) गुटनिरपेक्ष आंदोलन का सुदृढ़ीकरण
स) अमेरिका का एकमात्र महाशक्ति के रूप में उदय
द) संयुक्त राष्ट्र की भूमिका में गिरावट

सही उत्तर: स) अमेरिका का एकमात्र महाशक्ति के रूप में उदय
स्पष्टीकरण: 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद शक्ति-संतुलन एकध्रुवीय हो गया और अमेरिका अकेली सुपरपावर बचा।


Q2. क्योटो प्रोटोकॉल संबंधित है—

विकल्प:
अ) परमाणु निरस्त्रीकरण
ब) जलवायु परिवर्तन
स) व्यापार उदारीकरण
द) मानवाधिकार

सही उत्तर: ब) जलवायु परिवर्तन
स्पष्टीकरण: 1997 का क्योटो प्रोटोकॉल ग्रीनहाउस गैसों को कम करने और ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया अंतरराष्ट्रीय समझौता था।


Q3. Assertion – Reason (A–R)

Assertion (A): आज सुरक्षा में केवल सैन्य खतरे ही नहीं, बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय चिंताएँ भी शामिल हैं।
Reason (R): वैश्वीकरण ने सैन्य गठबंधनों से परे राज्यों को आपस में जोड़ा है।

विकल्प:
अ) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
ब) A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
स) A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
द) A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

सही उत्तर: अ) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
स्पष्टीकरण: सुरक्षा का दायरा बढ़कर आर्थिक व पर्यावरणीय खतरों को शामिल करता है; वैश्वीकरण ने देशों को आपसी निर्भरता में जोड़कर सुरक्षा को बहुआयामी बना दिया है।


Q4. निम्नलिखित में से कौन सा देश सोवियत संघ का हिस्सा था?

विकल्प:
अ) वियतनाम
ब) क्यूबा
स) उत्तरी कोरिया
द) कज़ाकिस्तान

सही उत्तर: द) कज़ाकिस्तान
स्पष्टीकरण: कज़ाकिस्तान USSR के 15 गणराज्यों में से एक था, बाकी विकल्प कभी भी सोवियत संघ का हिस्सा नहीं थे।


Q5. मानव सुरक्षा की अवधारणा को प्रमुखता मिली—

विकल्प:
अ) 1960 के दशक में
ब) 1970 के दशक में
स) 1980 के दशक में
द) 1990 के दशक में

सही उत्तर: द) 1990 के दशक में
स्पष्टीकरण: 1994 के UNDP Human Development Report में पहली बार Human Security को वैश्विक स्तर पर परिभाषित किया गया।


Q6. ताशकंद समझौते (1966) के समय भारत के विदेश मंत्री कौन थे?

विकल्प:
अ) सरदार स्वर्ण सिंह
ब) अटल बिहारी वाजपेयी
स) लाल बहादुर शास्त्री
द) पी.वी. नरसिम्हा राव

सही उत्तर: अ) सरदार स्वर्ण सिंह
स्पष्टीकरण: ताशकंद समझौते के समय विदेश मंत्री स्वर्ण सिंह थे; लाल बहादुर शास्त्री उस समय भारत के प्रधानमंत्री थे।


Q7. गुटनिरपेक्ष आंदोलन का प्राथमिक उद्देश्य था—

विकल्प:
अ) सैन्य गठबंधन
ब) शीत युद्ध गुटों से बचना
स) औपनिवेशिक विस्तार को बढ़ावा देना
द) नाटो को मजबूत करना

सही उत्तर: ब) शीत युद्ध गुटों से बचना
स्पष्टीकरण: NAM का उद्देश्य था कि सदस्य देश न अमेरिका गुट में शामिल हों, न सोवियत गुट में।


Q8. भारत के मिश्रित अर्थव्यवस्था मॉडल के निर्माता कौन थे?

विकल्प:
अ) महात्मा गांधी
ब) जवाहरलाल नेहरू
स) बी.आर. अम्बेडकर
द) इंदिरा गांधी

सही उत्तर: ब) जवाहरलाल नेहरू
स्पष्टीकरण: भारत में सार्वजनिक + निजी क्षेत्र को मिलाकर विकास का मिश्रित मॉडल नेहरू द्वारा तैयार किया गया।


Q9. “गरीबी हटाओ” का नारा किसने दिया?

विकल्प:
अ) इंदिरा गांधी
ब) राजीव गांधी
स) मोरारजी देसाई
द) लाल बहादुर शास्त्री

सही उत्तर: अ) इंदिरा गांधी
स्पष्टीकरण: इंदिरा गांधी ने 1971 के चुनाव में “गरीबी हटाओ” का नारा दिया था।


Q10. नेताओं का उनके दलों से मिलान कीजिए:

नेता — दल
I. जयप्रकाश नारायण — —i. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
II. ई.एम.एस. नंबूदरीपाद — ii. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
III. सी. राजगोपालाचारी — iii. स्वतंत्र पार्टी
IV. इंदिरा गांधी — ——–iv. जनता पार्टी

विकल्प:
अ) I-(iv), II-(i), III-(iii), IV-(ii)
ब) I-(ii), II-(iii), III-(iv), IV-(i)
स) I-(iii), II-(iv), III-(i), IV-(ii)
द) I-(i), II-(ii), III-(iii), IV-(iv)

सही उत्तर: अ) I-(iv), II-(i), III-(iii), IV-(ii)
स्पष्टीकरण: यही एक विकल्प है जिसमें सभी मेल 100% सही हैं।


Q11. बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री कौन थे?

विकल्प:
अ) शेख मुजीबुर रहमान
ब) जिया-उर-रहमान
स) खालिदा जिया
द) हुसैन मुहम्मद इरशाद

सही उत्तर: अ) शेख मुजीबुर रहमान
स्पष्टीकरण: 1971 में स्वतंत्रता के बाद वे बांग्लादेश के प्रथम प्रधानमंत्री बने।


Q12. कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें:

I) हरियाणा
II) नागालैंड
III) उत्तराखंड
IV) असम

विकल्प:
अ) I, II, IV, III
ब) I, III, IV, II
स) II, I, IV, III
द) IV, III, II, I

राज्यों का गठन वर्ष:
असम – 1950
नागालैंड – 1963
हरियाणा – 1966
उत्तराखंड – 2000

सही क्रम = II → I → IV → III

सही उत्तर: स) II, I, IV, III
स्पष्टीकरण: यही सही ऐतिहासिक क्रम है।


खंड–ख (6 × 2 = 12 अंक)


Q13. भारत की प्रथम पंचवर्षीय योजना के कोई दो उद्देश्य बताइए। (2 अंक)

उत्तर (कोई दो बिंदु):

  1. कृषि क्षेत्र का विकास – खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना और खेती को आधुनिक बनाना।
  2. सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण – नहरों, बांधों और सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार।
  3. गरीबी उन्मूलन – ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और जीवन स्तर सुधारना।
  4. भूमि सुधार – भूमिहीन किसानों को भूमि उपलब्ध कराना।

Q14. क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में ‘दक्षेस’ (SAARC) की भूमिका की व्याख्या कीजिए। (2 अंक)

उत्तर:

  1. आर्थिक व सामाजिक सहयोग को बढ़ावा – व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में दक्षिण एशियाई देशों के बीच सहयोग बढ़ाया।
  2. विश्वास निर्माण और शांति – SAARC सम्मेलन और बैठकों द्वारा क्षेत्र के देशों के बीच संवाद बढ़ाकर तनाव कम करने में भूमिका निभाई।

Q15. सामूहिक सुरक्षा और सहकारी सुरक्षा के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)

उत्तर (अंतर):

सामूहिक सुरक्षा (Collective Security)सहकारी सुरक्षा (Cooperative Security)
1. किसी एक सदस्य पर हमले को सभी पर हमला माना जाता है।1. साथ मिलकर सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करना।
2. उद्देश्य – आक्रमणकारी राज्य के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई।2. उद्देश्य – विश्वास निर्माण, हथियार नियंत्रण और संवाद।

Q16. भारत में हरित क्रांति क्यों शुरू की गई? (2 अंक)

उत्तर:

  1. खाद्यान्न संकट दूर करने के लिए – 1960 के दशक में बढ़ती आबादी के सामने खाद्यान्न उत्पादन कम था और लगातार अकाल जैसी स्थिति बन रही थी।
  2. कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए – उच्च उपज वाली किस्मों (HYV), रासायनिक उर्वरक, सिंचाई और आधुनिक तकनीक अपनाकर आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।

Q17. गठबंधन सरकार और एकदलीय प्रभुत्व के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)

गठबंधन सरकारएकदलीय प्रभुत्व
1. कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं।1. एक ही दल लगातार बहुमत पाता है और लंबे समय तक सत्ता में रहता है।
2. नीतियाँ आपसी सहमति व समझौते पर आधारित होती हैं।2. नीतियों पर प्रमुख दल का सीधा प्रभाव होता है।

Q18. उदाहरण सहित “वैश्विक साझी संपदा’’ (Global Commons) शब्द को परिभाषित कीजिए। (2 अंक)

उत्तर:

  • परिभाषा: वे क्षेत्र या संसाधन जो किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं होते और पूरी मानवता के साझा उपयोग में आते हैं।
  • उदाहरण:
    1. अंतरिक्ष
    2. महासागर / अंतरराष्ट्रीय जल
    3. अंटार्कटिका
    4. वायुमंडल


Q19. बांडुंग सम्मेलन (1955) में भारत की भूमिका का विवरण दीजिए।

उत्तर :
भारत ने 1955 के बांडुंग सम्मेलन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बिंदुवार उत्तर:

  1. सम्मेलन की प्रेरक शक्ति: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अफ्रीका-एशिया एकजुटता की पहल की और उपनिवेशवाद के विरुद्ध साझा मंच तैयार किया।
  2. गुटनिरपेक्षता का आधार: भारत ने ‘कोल्ड वॉर’ में तटस्थ रहने और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की वकालत की, जो आगे चलकर NAM (Non-Aligned Movement) की नींव बनी।
  3. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर ज़ोर: भारत ने पंचशील सिद्धांतों – शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता – को सम्मेलन के साझा घोषणापत्र में शामिल करवाया।
  4. नव-स्वतंत्र देशों की आवाज़: भारत ने एशियाई और अफ्रीकी देशों के हितों, आर्थिक सहयोग और उपनिवेशवाद/नस्लवाद के अंत की मांग को दृढ़ता से प्रस्तुत किया।

Q20. “क्षेत्रीय आकांक्षाएँ भारत में लोकतंत्र को मजबूत बनाती हैं।” उदाहरणों सहित इसकी पुष्टि कीजिए।

उत्तर :
भारत की विविधता के कारण विभिन्न क्षेत्र अपनी पहचान और राजनीतिक भागीदारी की आकांक्षा रखते हैं, जो लोकतंत्र को और सशक्त करती है।

  1. राज्य पुनर्गठन: भाषाई और क्षेत्रीय मांगों के आधार पर राज्य बनाने (जैसे आंध्र प्रदेश 1953, महाराष्ट्र-गुजरात 1960, उत्तराखंड-छत्तीसगढ़-झारखंड 2000) ने लोकतंत्र में जनता की भागीदारी बढ़ाई।
  2. संवैधानिक समाधान: भारतीय लोकतंत्र ने क्षेत्रीय मांगों को दमन के बजाय संविधान और वार्ता के माध्यम से हल किया—जैसे असम समझौता (1985), मिज़ो समझौता (1986)।
  3. क्षेत्रीय दलों का उदय: DMK, TDP, AGP, AAP जैसे क्षेत्रीय दलों ने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति में स्थान दिया।
  4. बहुलवाद की मजबूती: विविध आवाज़ें सुनने और उन्हें प्रतिनिधित्व देने से लोकतंत्र अधिक सहभागी, उत्तरदायी और समावेशी हुआ।

Q21(A) 1991 के बाद भारत के संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंधों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर :
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

  1. आर्थिक सहयोग: उदारीकरण के बाद अमेरिकी निवेश में वृद्धि हुई; व्यापार कई गुना बढ़ा और आईटी-सर्विस सेक्टर में सहयोग गहरा हुआ।
  2. रणनीतिक भागीदारी: 2005 में ‘सिविल न्यूक्लियर डील’ ने दोनों देशों को रणनीतिक साझेदार बनाया; रक्षा सहयोग, सैन्य अभ्यास (मालाबार) बढ़े।
  3. वैज्ञानिक-तकनीकी संबंध: अंतरिक्ष, रक्षा तकनीक, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा आदि क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ी।
  4. प्रवासी भारतीय समुदाय का योगदान: अमेरिका में भारतीय समुदाय ने संबंधों को मजबूत किया; उच्च शिक्षा, तकनीक और राजनीति में भारतीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हुई।

Q21(B) अथवा — सोवियत प्रणाली की दो शक्तियों और दो कमजोरियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर :

दो शक्तियाँ:

  1. मजबूत केंद्रीकृत योजना: योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था के कारण भारी उद्योग, अंतरिक्ष और सैन्य तकनीक में तेज़ विकास संभव हुआ।
  2. समानता और सामाजिक सुरक्षा: शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार सभी के लिए उपलब्ध; आय असमानता कम।

दो कमजोरियाँ:

  1. आर्थिक जड़ता और कमी: अत्यधिक केंद्रीकरण और प्रतिस्पर्धा की कमी से उपभोक्ता वस्तुओं की कमी और नवाचार रुक गया।
  2. राजनीतिक दमन: एक-दलीय शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभाव और असहमति को दबाने की प्रवृत्ति—प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी बनी।

22(A) वैश्वीकरण के किन्हीं दो राजनीतिक परिणामों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर :

  1. राज्य की भूमिका में कमी: निर्णय-निर्माण में बाजार, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ (IMF, WTO) प्रभावशाली हुईं।
  2. लोकतांत्रिक मूल्य एवं मानवाधिकारों का प्रसार: वैश्वीकरण ने लोकतंत्र, मानवाधिकार, पारदर्शिता और स्वतंत्र मीडिया जैसे मूल्यों को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित किया।

22(B) अथवा —

कल्याणकारी राज्य का स्थान बाजार अर्थव्यवस्था द्वारा क्यों लिया जा रहा है? प्रमुख कारणों द्वारा स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :

  1. राज्य की वित्तीय सीमाएँ: कल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधनों की कमी व घाटा; इसलिए बाजार आधारित मॉडल अपनाया गया।
  2. दक्षता और प्रतिस्पर्धा: निजी क्षेत्र अधिक कुशल, तकनीकी और तेज़—जिससे सेवाएँ बेहतर हुईं।
  3. वैश्वीकरण का दबाव: विश्व व्यापार और पूँजी के प्रवाह के अनुरूप नीतियाँ बनाने की आवश्यकता।
  4. उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण (LPG) नीति: 1991 के बाद भारत सहित कई देशों में बाज़ार संचालित सुधार तेज़ हुए।

Q23. 1989 के लोकसभा चुनाव के चार प्रमुख परिणामों का वर्णन कीजिए।

उत्तर कांग्रेस का पतन: 1984 के मुकाबले कांग्रेस को काफ़ी कम सीटें मिलीं; उसका प्रभुत्व समाप्त हुआ।

गुटनिरपेक्ष जनमोर्चा का उभार: जनता दल के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार बनी; वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री बने।

भाजपा का उभार: भाजपा पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत शक्ति के रूप में उभरी (राम-जन्मभूमि आंदोलन के कारण समर्थन बढ़ा)।

गठबंधन युग की शुरुआत: कोई भी दल पूर्ण बहुमत न ला सका, जिससे भारतीय राजनीति में स्थायी गठबंधन युग की शुरुआत हुई।


खंड घ ( चित्र आधारित प्रश्न) (3×4=12 अंक)

नीचे दिए गए चित्र का अध्ययन कीजिए और उसके बाद दिए गए प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उचित उत्तर चुनिए :

i. पानी की बोतल पर अंकित पृथ्वी की छवि मुख्यतः किसका प्रतीक है?

उत्तर ब) जल निजीकरण

स्पष्टीकरण:

पानी की बोतल पर पृथ्वी की छवि अक्सर जल संसाधनों के निजीकरण और व्यावसायीकरण का प्रतीक है, जहां पानी को एक साझा संसाधन के बजाय एक उत्पाद के रूप में बेचा जाता है. यह बोतलबंद पानी उद्योग के पर्यावरणीय प्रभाव और पानी तक सार्वभौमिक पहुंच के मुद्दों को भी उजागर करता है. [1]

ii. कौन सा अंतर्राष्ट्रीय समझौता ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने पर केंद्रित है और अप्रत्यक्ष रूप से जल स्थिरता को बढ़ावा देता है?

उत्तर: ब) क्योटो प्रोटोकॉल

स्पष्टीकरण:

क्योटो प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है. जलवायु परिवर्तन को संबोधित करके, यह अप्रत्यक्ष रूप से जल स्थिरता को बढ़ावा देता है क्योंकि जलवायु परिवर्तन जल चक्र और उपलब्धता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है. [2]

iii. निम्नलिखित में से किसे ‘वैश्विक साझा’ संसाधन माना जाता है?

उत्तर द) महासागर और वायुमंडल

स्पष्टीकरण:

‘वैश्विक साझा’ संसाधन उन क्षेत्रों या संसाधनों को संदर्भित करते हैं जो किसी एक राष्ट्र के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं और पूरी मानवता के साझा हित में हैं. महासागर और वायुमंडल इसके प्रमुख उदाहरण हैं.

iv. किस शिखर सम्मेलन ने पर्यावरणीय चिंताओं को पहली बार वैश्विक राजनीति के केंद्र में लाया गया?

उत्तर: द) स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972

स्पष्टीकरण:

1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन पर्यावरण के मुद्दों पर केंद्रित पहला बड़ा वैश्विक सम्मेलन था. इसने पर्यावरणीय चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के एजेंडे में सबसे आगे ला दिया और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया.

नीचे प्रश्न संख्या 24 के स्थान पर दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए दिया है


i. उस अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का नाम बताइए जहाँ एजेंडा 21 को अपनाया गया था।

उत्तर:
1992 का रियो डी जेनेरियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन (UNCED / Earth Summit, Rio).


ii. पर्यावरणीय चिंताएँ वैश्विक राजनीति का हिस्सा बनने का एक कारण बताइए।

उत्तर:
क्योंकि पर्यावरणीय समस्याएँ सीमाहीन हैं (जैसे जलवायु परिवर्तन, ओज़ोन क्षरण) और किसी एक देश द्वारा हल नहीं की जा सकतीं, इसलिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है।


iii. किसी एक देश का नाम बताइए जिसे क्योटो प्रोटोकॉल के तहत बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्यों से छूट दी गई थी।

उत्तर:
भारत को क्योटो प्रोटोकॉल में बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती से छूट दी गई थी।
(अन्य उदाहरण: चीन, ब्राज़ील आदि)


iv. 1992 में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन का क्या महत्व है?

उत्तर:
1992 का रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन महत्वूपर्ण है क्योंकि इसने सतत विकास को वैश्विक एजेंडा में प्रमुखता दी और एजेंडा 21, जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क (UNFCCC) तथा जैव विविधता समझौता (CBD) जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपनाया।


उत्तर:

नीचे आपके सभी प्रश्नों के सटीक, संक्षिप्त और CBSE पैटर्न के अनुसार उत्तर दिए जा रहे हैं — पहले दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों वाले प्रश्न, फिर गद्यांश आधारित MCQ, और उसके बाद 6 अंक वाले उत्तर


दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए — प्रश्न संख्या 25 के स्थान पर

i) स्वतंत्रता के तुरंत बाद भारतीय राजनीति पर हावी होने वाली राजनीतिक पार्टी का नाम बताइए।

उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

ii) स्वतंत्र भारत में प्रथम आम चुनाव किस वर्ष हुए थे?

उत्तर: 1951–52

iii) स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री कौन थे?

उत्तर: जवाहरलाल नेहरू

iv) स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस प्रणाली के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेता का नाम बताइए?

उत्तर: जवाहरलाल नेहरू


Q26. गद्यांश आधारित MCQs

आसियान की स्थापना 1967 में इस क्षेत्र के पाँच देशों इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने बैंकॉक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करके की थी। आसियान के मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना और उसके माध्यम से ‘सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास करना था। इसका एक अन्य उद्देश्य कानून के शासन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के आधार पर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना था। इन वर्षों में ब्रुनेई दारुस्सलाम, वियतनाम, लाओ पीडीआर, म्यांमार (बर्मा) और कंबोडिया भी आसियान में शामिल हुए जिससे इसकी संख्या दस हो गई।

i. आसियान की स्थापना हुई थी:

सही उत्तर: (b) 1967

ii. किस घोषणापत्र के आधार पर आसियान की स्थापना हुई?

सही उत्तर: (ब) बैंकॉक घोषणापत्र

iii. निम्नलिखित में से कौन आसियान का संस्थापक सदस्य नहीं है?

सही उत्तर: (स) वियतनाम

iv. आसियान के गठन के समय इसका प्राथमिक उद्देश्य क्या था?

सही उत्तर: (ब) आर्थिक विकास में तेजी लाना


खंड–ड (6 अंक वाले प्रश्न)


27A. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को और अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए तीन सुधार सुझाइए। भारत स्थायी सदस्यता का हकदार क्यों है?

संभावित सुधार :

  1. स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना — ताकि विश्व के अधिक क्षेत्र प्रतिनिधित्व पा सकें।
  2. वीटो शक्ति में सुधार — या तो इसे समाप्त करना या सभी के लिए समान मानक बनाना।
  3. क्षेत्रीय संतुलन — अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना।

भारत का स्थायी सदस्यता का दावा :

  1. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और स्थिर राजनीतिक प्रणाली।
  2. UN शांति रक्षा अभियानों में प्रमुख योगदानकर्ता
  3. बड़ी अर्थव्यवस्था व जनसंख्या—विश्व स्तर पर प्रभावशाली भूमिका।

27B. संयुक्त राष्ट्र के विकास का वर्णन करें और इसकी विशेष एजेंसियों की भूमिका समझाइए।

(3 + 3 = 6 अंक)

उत्तर: संयुक्त राष्ट्र का विकास

  1. स्थापना और उद्देश्य (1945):
    द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 51 देशों ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्थापना की, ताकि विश्व शांति बनाए रखी जा सके, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोका जा सके और सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
  2. सदस्य देशों की वृद्धि:
    समय के साथ स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले देशों की संख्या बढ़ी, जिससे UN 51 सदस्यों से बढ़कर 193 देशों वाला वैश्विक संगठन बन गया—जो इसे विश्व का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच बनाता है।
  3. कार्य क्षेत्रों का विस्तार:
    शुरुआत में UN का ध्यान शांति और सुरक्षा पर था, पर अब यह विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, मानवाधिकार, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा, और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में भी कार्य कर रहा है।
    इसे समर्थन देने के लिए कई विशेष एजेंसियाँ स्थापित की गईं।

UN की विशेष एजेंसियों की भूमिका

  1. WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन):
    दुनिया भर में स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम संचालित करता है—जैसे बीमारियों का उन्मूलन (पोलियो), महामारी नियंत्रण, टीकाकरण कार्यक्रम, दवाओं और स्वास्थ्य मानकों का निर्धारण।
  2. UNESCO (शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति संगठन):
    शिक्षा के अवसर बढ़ाता है, सांस्कृतिक विरासत (World Heritage Sites) का संरक्षण करता है, वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है तथा वैश्विक शैक्षिक नीतियों को सहयोग देता है।
  3. UNICEF (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष):
    बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण, शिक्षा और सुरक्षा के लिए कार्य करता है। दुनिया के सबसे कमजोर बच्चों तक सहायता पहुँचाता है।

28A. 1990 के दशक से भारत में राजनीतिक सहमति के तीन क्षेत्र बताइए।

(3 + 3 = 6 अंक)

उत्तर :

  1. आर्थिक उदारीकरण और सुधारों पर सहमति

० 1991 में शुरू हुई नई आर्थिक नीतियाँ—उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण—को बाद की सभी सरकारों ने जारी रखा।

० राजनीतिक दलों में व्यापक सहमति रही कि वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़कर विकास, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

2. विदेश नीति में निरंतरता और संतुलन पर सहमति

० सभी दलों ने अमेरिका, यूरोप, रूस, पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ बहुपक्षीय एवं संतुलित संबंधों को बनाए रखने पर सहमति दिखाई।

० परमाणु कार्यक्रम, शांति-रक्षा, पड़ोस नीति और गुटनिरपेक्षता की परंपरा को भी सभी सरकारों ने स्वीकार किया।

3. लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी राजनीति पर सहमति

० भारत में सभी दल संवैधानिक लोकतंत्र, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, न्यायपालिका और संघीय ढांचे को स्वीकार करते हैं।

० राजनीतिक बदलाव सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण, गठबंधन सरकारों, और चुनावों के माध्यम से होते रहे—जो लोकतंत्र पर सहमति दर्शाता है।

सारांश

आर्थिक सुधारों की निरंतरता, विदेश नीति में संतुलन, और लोकतांत्रिक प्रणाली की स्वीकार्यता—ये तीन क्षेत्र 1990 के दशक से भारत में स्थायी राजनीतिक सहमति के प्रमुख उदाहरण हैं।


28B. भारत की बहुदलीय प्रणाली के चार लाभ समझाइए।

(6 अंक)

उत्तर : भारत की बहुदलीय प्रणाली के चार लाभ

  1. विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक समूहों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है

भारत एक विविध देश है जिसमें धर्म, भाषा, संस्कृति और जाति के अनेक समूह हैं।
बहुदलीय प्रणाली इन विभिन्न समूहों को प्रतिनिधित्व का अवसर देती है, जिससे लोकतंत्र अधिक सहभागी और व्यापक बनता है।

  1. गठबंधन राजनीति के माध्यम से सहमति-आधारित निर्णय-निर्माण

बहुदलीय प्रणाली में किसी एक पार्टी का प्रभुत्व कम होता है, जिससे गठबंधन सरकारें बनती हैं।
गठबंधन में निर्णय-निर्माण सहमति पर आधारित होता है, जिसके कारण नीतियाँ व्यापक हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।

  1. मतदाताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं

अनेक पार्टियों के होने से नागरिकों को अपनी विचारधारा, मुद्दों और प्राथमिकताओं के अनुसार सही प्रतिनिधि चुनने के लिए कई विकल्प उपलब्ध होते हैं।
इससे चुनाव अधिक लोकतांत्रिक और प्रतिस्पर्धात्मक बनते हैं।

  1. सत्तापक्ष पर नियंत्रण और संतुलन

बहुदलीय व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका मजबूत रहती है, क्योंकि कई पार्टियाँ सरकार के निर्णयों पर निगरानी रखती हैं।
इससे सरकार मनमाने ढंग से निर्णय नहीं ले सकती और जवाबदेही बनी रहती है|


29A. भारत में भाषाई राज्यों के निर्माण की आवश्यकता की व्याख्या कीजिए।

(6 अंक)

उत्तर :

भारत में भाषाई राज्यों के निर्माण की आवश्यकता

भारत विविध भाषाओं वाला देश है। स्वतंत्रता के बाद यह प्रश्न महत्वपूर्ण था कि राज्यों का पुनर्गठन किस आधार पर किया जाए। अंततः भाषाई आधार पर राज्यों के निर्माण की आवश्यकता निम्न कारणों से महसूस की गई:

  1. प्रशासनिक सुविधा और सुशासन के लिए

एक ही भाषा बोलने वाले क्षेत्रों को एक राज्य में रखने से प्रशासन चलाना सरल हो जाता है।
भाषा के आधार पर संचार, शिक्षा, न्याय और शासन को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।

2. सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव की रक्षा

हर भाषा अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और साहित्य की वाहक होती है।
भाषाई राज्यों के निर्माण से लोगों की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिला और वे अपनी भाषा के प्रति गर्व महसूस करने लगे।

3. लोकतांत्रिक भावना को सशक्त बनाना

लोगों को अपनी मातृभाषा में शासन करने का अवसर मिलता है, जिससे वे शासन-प्रक्रिया से अधिक जुड़ते हैं।
इससे राजनीतिक भागीदारी बढ़ती है और लोकतंत्र मजबूत होता है।

4. क्षेत्रीय असन्तोष और आंदोलनों को रोकना

आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात आदि में भाषाई आधार पर राज्यों की माँग के आंदोलन उभर रहे थे।
भाषाई पुनर्गठन से इन असन्तोषों को दूर किया गया और देश में स्थिरता लाई गई।

5. आर्थिक विकास में संतुलन

भाषाई राज्यों के गठन के बाद क्षेत्रीय विकास योजनाएँ स्थानीय जरूरतों के अनुसार बनाई जा सकीं।
इससे आर्थिक असमानताएँ कम हुईं और राज्यों को अपनी प्राथमिकताओं अनुसार विकास करने का अवसर मिला।

6. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना

भाषाई पुनर्गठन से लोगों को यह विश्वास मिला कि भारत विविधताओं का सम्मान करता है।
इससे एकता के लिए संभावित खतरे कम हुए और राष्ट्र एक संयुक्त राजनीतिक इकाई के रूप में मजबूत हुआ।

निष्कर्ष

भाषाई राज्यों का निर्माण भारत की विविधता को स्वीकार करने, असन्तोष को दूर करने, प्रशासन को सरल बनाने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए आवश्यक था।


29B. स्वतंत्रता के बाद हैदराबाद और जूनागढ़ के प्रति भारत की नीति की व्याख्या कीजिए।

(6 अंक)

उत्तर:

स्वतंत्रता के बाद हैदराबाद और जूनागढ़ के प्रति भारत की नीति (6 अंक)

भारत की प्राथमिकता स्वतंत्रता के बाद देश को राजनीतिक रूप से एकीकृत करना थी। इसी संदर्भ में हैदराबाद और जूनागढ़ के मामलों में भारत ने कूटनीति, जनता की इच्छा और आवश्यक होने पर सैन्य कार्रवाई का उपयोग किया।

(A) हैदराबाद के प्रति भारत की नीति –

  1. कूटनीतिक प्रयास (स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट, 1947)

निज़ाम ने भारत में विलय से इनकार किया, इसलिए भारत ने पहले शांतिपूर्ण समाधान हेतु स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट किया।

  1. जनता की इच्छा और कानून-व्यवस्था

राजाकारों द्वारा हिंसा और आतंक फैलाया जा रहा था। अधिकांश जनता भारत में शामिल होना चाहती थी। भारत ने जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

  1. ‘पोलो ऑपरेशन’ (सैन्य कार्रवाई, 1948)

कूटनीति असफल होने पर भारत ने सीमित सैन्य अभियान चलाया। पाँच दिन में निज़ाम ने आत्मसमर्पण किया और हैदराबाद भारत का हिस्सा बना।

(B) जूनागढ़ के प्रति भारत की नीति –

  1. लोकतांत्रिक सिद्धांत – जनता की इच्छा सर्वोपरि

हिंदू बहुल राज्य होने के बावजूद नवाब ने पाकिस्तान में विलय की घोषणा कर दी। भारत ने इसे जनता की इच्छा के विरुद्ध माना।

  1. हस्तक्षेप और प्रशासन पर नियंत्रण

राज्य में अराजकता बढ़ने पर भारत ने शांति और स्थिरता हेतु सैन्य बल भेजा और प्रशासन संभाला।

  1. जनमत-संग्रह (1948)

भारत ने जनमत-संग्रह कराया जिसमें 99% से अधिक जनता ने भारत में विलय का समर्थन किया। इसके बाद जूनागढ़ आधिकारिक रूप से भारत का हिस्सा बना।

निष्कर्ष

दोनों मामलों में भारत ने पहले कूटनीति, फिर जनता की इच्छा और अंत में राष्ट्रीय एकता तथा सुरक्षा को प्राथमिकता दी। इस नीति ने देश के एकीकरण को मजबूत किया।

हैदराबाद:

  1. निज़ाम का भारत में विलय को न मानना।
  2. ‘ऑपरेशन पोलो’ द्वारा सैन्य कार्रवाई।
  3. जनता की इच्छा का सम्मान करते हुए हैदराबाद को भारत में विलय कराया गया।

जूनागढ़:

  1. नवाब ने पाकिस्तान में विलय की घोषणा की।
  2. जनता असंतुष्ट—व्यापक विरोध।
  3. भारत ने जनमत-संग्रह कराया, जिसमें 99% लोगों ने भारत में विलय का समर्थन किया

30A. एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में आसियान की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

(6 अंक)

उत्तर :

नीचे “एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में आसियान (ASEAN) की भूमिका” का उत्तर 6 अंकों के अनुसार बिंदुवार, सरल और परीक्षा-उपयुक्त रूप में दिया गया है:

एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में आसियान की भूमिका –

आसियान (Association of Southeast Asian Nations) की स्थापना 1967 में बैंकॉक घोषणा के माध्यम से हुई। इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक सहयोग तथा क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना था। समय के साथ यह एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन बन गया।

1. आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय विकास

आसियान ने सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा दिया।
ASEAN Free Trade Area (AFTA) ने क्षेत्र में व्यापार बाधाओं को कम किया और आर्थिक एकीकरण को मजबूत किया।

2. राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा सहयोग

आसियान ने क्षेत्र में तनाव कम करने और संवाद को बढ़ावा देने का मंच प्रदान किया।
ASEAN Regional Forum (ARF) के माध्यम से रक्षा और सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग बढ़ा।

3. विवादों को शांतिपूर्वक सुलझाने की नीति

आसियान “शांतिपूर्ण सहअस्तित्व” और “ग़ैर-हस्तक्षेप” के सिद्धांत पर चलता है।
इसने क्षेत्रीय देशों को सैन्य संघर्षों से बचने और बातचीत के माध्यम से समाधान करने को प्रोत्साहित किया।

4. सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग

शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सांस्कृतिक आदान–प्रदान के क्षेत्र में आसियान ने महत्वपूर्ण प्रयास किए।
ASEAN Socio-Cultural Community (ASCC) के तहत क्षेत्रीय पहचान को मजबूत किया गया।

5. वैश्विक मंच पर सामूहिक आवाज

आसियान ने सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक संयुक्त आवाज दी।
चीन, भारत, अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ के साथ साझेदारी के माध्यम से रणनीतिक महत्व बढ़ा।

6. क्षेत्रीय आर्थिक शक्ति के रूप में उभरना

आज आसियान लगभग 70 करोड़ आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्थान रखता है।
यह विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक समूहों में से एक है।

निष्कर्ष

एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में आसियान आर्थिक, राजनीतिक, सुरक्षा और सामाजिक सभी स्तरों पर प्रभावी भूमिका निभाता है। इसने दक्षिण-पूर्व एशिया को स्थिरता, विकास और सहयोग का मॉडल बनाया है।


30B. क्या यूरोपीय संघ शक्ति का एक वैकल्पिक केंद्र है? उचित तर्क दीजिए।

(6 अंक)

उत्तर: यूरोपीय संघ (EU) 27 देशों का एक शक्तिशाली क्षेत्रीय संगठन है जिसने आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रभाव स्थापित किया है। कई कारणों से इसे विश्व राजनीति में शक्ति का एक वैकल्पिक केंद्र माना जाता है।

  1. आर्थिक महाशक्ति के रूप में EU

EU विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
EU का संयुक्त GDP अमेरिका और चीन के बराबर है, जिससे यह एक वैश्विक आर्थिक शक्ति बनता है।
यूरो (Euro) दुनिया की सबसे मजबूत और सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली मुद्राओं में है।

  1. एकीकृत बाजार और व्यापारिक क्षमता

EU दुनिया का एक विशाल सिंगल मार्केट बनाता है।
सदस्य देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और लोगों की मुक्त आवाजाही है।
EU कई देशों के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है — इससे इसका वैश्विक आर्थिक प्रभाव बढ़ता है।

  1. राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव

EU अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक एकीकृत कूटनीतिक शक्ति के रूप में कार्य करता है।
संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन और G-20 जैसे मंचों पर इसकी संयुक्त आवाज महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  1. सैन्य और सुरक्षा सहयोग

हालांकि EU NATO जितना सैन्य महाशक्ति नहीं है,
परंतु सुरक्षा और रक्षा नीति (CSDP) के माध्यम से यह शांति-स्थापना और वैश्विक सुरक्षा मिशनों में योगदान देता है।
फ्रांस जैसे परमाणु-संपन्न देश सदस्य होने के कारण इसकी रणनीतिक शक्ति बढ़ती है।

  1. वैश्विक मानदंड तय करने की क्षमता

EU पर्यावरण, मानवाधिकार, उपभोक्ता सुरक्षा और डिजिटल नियमों जैसे क्षेत्रों में वैश्विक मानक स्थापित करता है।
कई देश और कंपनियाँ EU के नियमों का पालन करने को मजबूर होती हैं, जिससे यह “नॉर्मेटिव पावर” बन जाता है।

  1. क्षेत्रीय एकीकरण का मॉडल

EU दुनिया का सबसे सफल क्षेत्रीय एकीकरण मॉडल है।
यह दुनिया के अन्य संगठनों (जैसे आसियान, AU, MERCOSUR) के लिए मार्गदर्शक बना है।

निष्कर्ष

हाँ, यूरोपीय संघ विश्व राजनीति में आर्थिक, राजनीतिक, कूटनीतिक और मानदंड निर्माण के क्षेत्रों में शक्ति का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक केंद्र है।
हालांकि सैन्य दृष्टि से इसकी सीमाएँ हैं, परंतु वैश्विक प्रभाव के कारण इसे अमेरिका और चीन के बाद एक प्रमुख शक्ति केंद्र माना जाता है।


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