MCQs कक्षा 12 इतिहास — अध्याय 9: उपनिवेशवाद और देहात, उत्तरों और संक्षिप्त व्याख्याओं सहित
एनसीईआरटी अध्याय और विश्वसनीय नोट्स के आधार पर मुख्य तथ्य (स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी/महलवारी, संथाल विद्रोह, दक्कन के दंगे, जोतदार, ज़मींदार, नील, कपास की खेती में उछाल, आदि) संकलित किए गए। मैंने जिन प्रमुख स्रोतों का उपयोग किया: एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (भारतीय इतिहास के विषय – भाग III, अध्याय 9)
1–20: मूल तथ्यात्मक एकल-सही MCQ
प्रश्न 1. बंगाल में स्थायी बंदोबस्त किसने शुरू किया?
A. लॉर्ड वेलेस्ली
B. लॉर्ड कार्नवालिस
C. लॉर्ड डलहौजी
D. लॉर्ड हेस्टिंग्स
उत्तर: B. लॉर्ड कार्नवालिस।

उत्तर: B
व्याख्या: स्थायी बंदोबस्त 1793 में लॉर्ड कॉर्नवॉलिस (कॉर्नवॉलिस संहिता का हिस्सा) के तहत अधिनियमित किया गया था।
प्रश्न 2. स्थायी बंदोबस्त ने राजस्व की मांग को इस प्रकार तय किया –
A. केवल एक फसल के लिए
B. ज़मींदारों पर स्थायी रूप से
C. काश्तकारों के साथ वार्षिक समीक्षा योग्य राशि
D. फसल के अनुसार परिवर्तनशील
उत्तर: B. ज़मींदारों पर स्थायी रूप से
व्याख्या: इसने राजस्व को स्थायी रूप से तय कर दिया और ज़मींदारों को राजस्व संग्रहकर्ता/भूमि मालिक बना दिया।
प्रश्न 3. किस प्रणाली में सरकार और व्यक्तिगत कृषकों (रैयतों) के बीच सीधा समझौता शामिल था?
A. ज़मींदारी
B. महलवारी
C. रैयतवारी
D. जागीरदारी
उत्तर: C. रैयतवारी
व्याख्या: रैयतवारी के तहत सरकार सीधे कृषकों (रैयतों) के साथ समझौता करती थी।
प्रश्न 4. रैयतवाड़ी पहली बार किस प्रेसीडेंसी में लागू की गई थी?
A. बंगाल
B. मद्रास
C. बॉम्बे
D. पंजाब
उत्तर: B. मद्रास
व्याख्या: थॉमस मुनरो ने मद्रास प्रेसीडेंसी (19वीं शताब्दी के प्रारंभ) में रैयतवाड़ी की शुरुआत/कार्यान्वयन किया था।
प्रश्न 5. किस प्रणाली ने गाँव/संपत्ति (महल) के आधार पर राजस्व का आकलन किया?
A. रैयतवारी
B. महालवारी
C. ज़मींदारी
D. मुगल ज़ब्त
उत्तर: B. महालवारी
व्याख्या: महालवारी ने सामूहिक जिम्मेदारी के साथ महाल (गाँव/संपत्ति) की मांग तय की।
प्रश्न 6. महालवाड़ी प्रणाली सबसे पहले किसने तैयार की थी
A. थॉमस मुनरो ने
B. होल्ट मैकेंजी ने
C. लॉर्ड कॉर्नवालिस ने
D. वॉरेन हेस्टिंग्स ने
उत्तर: B. होल्ट मैकेंजी ने।

व्याख्या: होल्ट मैकेंज़ी ने 1822 में महालवारी की रचना की; बाद में इसे संशोधित किया गया (बेंटिंक/अन्य)।
प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन से समूह आदिवासी लोग थे जिन्होंने 1855 में राजमहल पहाड़ियों में विद्रोह किया था?
A. पहाड़िया
B. संथाल
C. मुंडा
D. भील
उत्तर: B. संथाल।

व्याख्या: संथाल (संथाल) विद्रोह (संथाल हुल) 30 जून 1855 को राजमहल/संथाल परगना में शुरू हुआ।
Q8. संथाल विद्रोह के नेताओं में शामिल थे
A. तांतिया टोपे और रानी लक्ष्मी बाई
B. सिद्धु और कान्हू मुर्मू
C. बिरसा मुंडा और तिलका मांझी
D. कित्तूर रानी चेन्नम्मा और नाना साहब
उत्तर: B. सिद्धु और कान्हू मुर्मू।

व्याख्या: संथाल विद्रोह का नेतृत्व सिधू और कान्हू मुर्मू ने किया था.
संथाल विद्रोह का परिणाम क्या था?
A. देश भर में ज़मींदारी का उन्मूलन
B. संथाल परगना (एक अलग जिला) का निर्माण
C. भारत की तत्काल स्वतंत्रता
D. स्थायी बंदोबस्त की समाप्ति
उत्तर: B. संथाल परगना का निर्माण
व्याख्या: विद्रोह के कारण संथाल परगना जिले (सोंथल परगना अधिनियम) सहित प्रशासनिक परिवर्तन हुए।
प्रश्न 10. 1860 के दशक में किस फसल में उछाल ने भारतीय कपास की माँग बढ़ाई?
A. चीनी में उछाल
B. अमेरिकी गृहयुद्ध/कपास में उछाल
C. नील में उछाल
D. चाय में उछाल
उत्तर: B. अमेरिकी गृहयुद्ध/कपास में उछाल।
व्याख्या: अमेरिकी गृहयुद्ध (1861-65) ने अमेरिकी कपास की आपूर्ति को बाधित कर दिया, जिससे भारत से कपास की माँग बढ़ गई (कपास में उछाल)।
प्रश्न 11. ग्रामीण बंगाल में ‘जोतदार’ कौन थे?
A. राजमहल पहाड़ियों में आदिवासी मुखिया
B. स्थानीय प्रभाव वाले धनी किसान/बड़े कृषक
C. ब्रिटिश जिला कलेक्टर
D. केवल साहूकार
उत्तर: B. स्थानीय प्रभाव वाले धनी किसान/बड़े कृषक।

व्याख्या: जोतदार बंगाल में भूमि, व्यापार और स्थानीय सत्ता को नियंत्रित करने वाले धनी किसान मालिक थे।
प्रश्न 12. इनमें से कौन स्थायी बंदोबस्त की विशिष्ट विशेषता नहीं थी?
A. ज़मींदारों को वंशानुगत अधिकार
B. राजस्व स्थायी रूप से तय
C. व्यक्तिगत कृषकों (रैयतों) के साथ सीधा बंदोबस्त
D. कंपनी शासन का समर्थन करने वाले एक भूस्वामी वर्ग का निर्माण
उत्तर: C. व्यक्तिगत कृषकों (रैयतों) के साथ सीधा बंदोबस्त।
व्याख्या: स्थायी बंदोबस्त में ज़मींदारों को मध्यस्थ के रूप में शामिल किया गया था, न कि रैयतों के साथ सीधा बंदोबस्त।
प्रश्न 13. 1875 के दक्कन दंगों का मुख्य लक्ष्य था

A. केवल ब्रिटिश अधिकारी
B. साहूकार और ऋण दस्तावेज
C. जमींदारों के महल
D. चाय बागान
उत्तर: B. साहूकार और ऋण दस्तावेज
व्याख्या: दक्कन के दंगों में किसानों ने साहूकारों पर हमला किया और ऋण बांड नष्ट कर दिए।
प्रश्न 14. औपनिवेशिक शासन के दौरान निम्नलिखित में से किसने किसानों की ऋणग्रस्तता बढ़ाई?
A. उच्च निश्चित राजस्व मांगें
B. शुरू से ही सहकारी ऋण समितियों का विकास
C. हर जगह कम भूमि राजस्व बोझ
D. रातोंरात बिचौलियों का उन्मूलन
उत्तर: A. उच्च निश्चित राजस्व मांगें।
व्याख्या: उच्च राजस्व मांग, फसल की विफलता और साहूकारी के साथ मिलकर, किसानों की ऋणग्रस्तता में वृद्धि हुई।
प्रश्न 15. आदिवासी/किसान शब्दावली में ‘दिकू’ का अर्थ अक्सर होता है
A. ब्रिटिश अधिकारी, साहूकार और बाहरी लोग जिन्हें शोषक के रूप में देखा जाता है
B. केवल ब्रिटिश अदालत के न्यायाधीश
C. कृषि उपकरण
D. स्थानीय त्यौहार
उत्तर: A. ब्रिटिश अधिकारी, साहूकार और बाहरी लोग जिन्हें शोषक के रूप में देखा जाता है।

व्याख्या: ‘दिकू’ शब्द का प्रयोग कई जनजातीय समूहों द्वारा शोषक बाहरी लोगों (जमींदार, साहूकार, अंग्रेज) के लिए किया जाता था।
प्रश्न 16. उपनिवेशवाद के तहत कृषि के व्यावसायीकरण का निम्नलिखित में से कौन सा प्रभाव था?
A. फसल पैटर्न में कोई बदलाव नहीं
B. नील, कपास जैसी नकदी फसलों में वृद्धि
C. किसानों के लिए सार्वभौमिक भूमि सुरक्षा
D. बाजार संबंधों का अंत
उत्तर: B. नील, कपास जैसी नकदी फसलों में वृद्धि
व्याख्या: औपनिवेशिक नीतियों और बाजार की माँग ने नकदी फसलों (जैसे, नील, कपास) की खेती को बढ़ावा दिया, जिससे स्थानीय फसल प्रणाली में बदलाव आया।
प्रश्न 17. नील की खेती के लिए मजबूर करने की नील बागान मालिकों की प्रणाली के कारण

A. हर जगह स्वैच्छिक नील की खेती
B. नील का प्रतिरोध (उदाहरण, बंगाल में 1859-60 का नील विद्रोह)
C. 1820 तक भारत से नील का पूर्ण उन्मूलन
D. किसानों की तत्काल समृद्धि
उत्तर: B. नील का प्रतिरोध (उदाहरण, 1859-60 का नील विद्रोह)।
व्याख्या: जबरन नील की खेती के कारण बंगाल में अशांति और नील विद्रोह (1859-60) हुआ।
प्रश्न 18. स्थायी बंदोबस्त के तहत राजस्व किस निकाय द्वारा एकत्र किया जाता था?
A. ब्रिटिश कलेक्टर सीधे रैयतों से
B. ज़मींदार मध्यस्थ के रूप में
C. केवल ग्राम पंचायतें
D. जनजातीय परिषदें
उत्तर: B. ज़मींदार मध्यस्थ के रूप में
व्याख्या: स्थायी बंदोबस्त के तहत ज़मींदार राजस्व एकत्र करने और कंपनी को भेजने के लिए जिम्मेदार थे।
प्रश्न 19. किस प्रेसीडेंसी ने बाद में बॉम्बे के कुछ हिस्सों में रैयतवाड़ी प्रणाली लागू की?

A. केवल बंगाल
B. मद्रास, फिर बॉम्बे
C. केवल पंजाब
D. केवल मध्य प्रांत
उत्तर: B. मद्रास, फिर बॉम्बे
व्याख्या: रैयतवारी मद्रास (थॉमस मुनरो) में शुरू हुई, और इसी तरह की बस्तियाँ बाद में बॉम्बे और अन्य क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में इस्तेमाल की गईं।
प्रश्न 20 18वीं-19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में बंगाल में जोतदारों बनाम ज़मींदारों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
A. गाँवों में ज़मींदारों के पास हमेशा जोतदारों से ज़्यादा शक्ति होती थी।
B. जोतदार अक्सर स्थानीय रूप से अनुपस्थित ज़मींदारों से ज़्यादा शक्तिशाली होते थे।
C. जोतदार ब्रिटिश अधिकारी होते थे।
D. जोतदार एक ब्रिटिश कर थे।
उत्तर: B. जोतदार अक्सर स्थानीय रूप से अनुपस्थित ज़मींदारों से ज़्यादा शक्तिशाली होते थे।
व्याख्या: धनी जोतदार स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली हो जाते थे; ज़मींदार कभी-कभी अनुपस्थित ज़मींदार होते थे।
21–40: एक अंक के तथ्यात्मक/अवधारणा बहुविकल्पीय प्रश्न (जारी)
प्रश्न 21. कॉर्नवॉलिस कोड ने कंपनी सेवा को तीन शाखाओं में विभाजित किया: राजस्व, न्यायिक और
वाणिज्यिक। A. वाणिज्यिक।
B. केवल सैन्य।
C. शैक्षिक।
D. धार्मिक।
उत्तर: A. वाणिज्यिक।
व्याख्या: कॉर्नवॉलिस कोड ने कंपनी सेवाओं को राजस्व, न्यायिक और वाणिज्यिक शाखाओं में पुनर्गठित किया।
प्रश्न 22. कौन सा शब्द एक किसान को दर्शाता है जो एक जमींदार के अधीन जमीन पर खेती करता है?
A. ज़मींदार
B. रैयत
C. जोतदार
D. कलेक्टर
उत्तर: B. रैयत
व्याख्या: ‘रैयत’ एक व्यक्तिगत कृषक/किसान को दर्शाता है।
प्रश्न 23. किस क्षेत्र से राजमहल पहाड़ियों की ओर संथालों का महत्वपूर्ण प्रवास हुआ ?

A. बंगाल/बिहार क्षेत्र (राजमहल)
B. पंजाब
C. केरल
D. असम
उत्तर: A. बंगाल/बिहार क्षेत्र (राजमहल)।
स्पष्टीकरण: संथाल राजमहल पहाड़ी क्षेत्र (बंगाल/बिहार क्षेत्र) में चले गए।
प्रश्न 24. दक्कन के दंगे मुख्य रूप से किस भारतीय क्षेत्र में हुए थे?
A. पूर्वी भारत
B. पश्चिमी दक्कन (पूना/अहमदनगर)
C. उत्तर-पश्चिम सीमांत
D. बंगाल डेल्टा
उत्तर: B. पश्चिमी दक्कन (पूना/अहमदनगर)।
व्याख्या: दक्कन के दंगे (1875) दक्कन के पूना (पुणे) और अहमदनगर जिलों में हुए थे।
प्रश्न 25. निम्नलिखित में से किसने स्थायी बंदोबस्त के तहत कर एकत्र करने वाले बिचौलियों की भूमिका निभाई?

A. रैयत सीधे
B. ज़मींदार
C. केवल ग्राम परिषदें
D. ब्रिटिश न्यायाधीश
उत्तर: B. ज़मींदार
व्याख्या: ज़मींदार मध्यस्थ थे जो लगान एकत्र करते थे और राजस्व भेजते थे।
प्रश्न 26. कौन सा विद्रोह ऋण बांड और दस्तावेजों के विनाश से जुड़ा है?
A. संथाल हुल
B. नील विद्रोह
C. दक्कन दंगे
D. मुंडा उलगुलान
उत्तर: C. दक्कन दंगे।
व्याख्या: दक्कन दंगों में ऋण बांड जलाना और साहूकारों पर हमला करना शामिल था।
प्रश्न 27. महलवारी में ‘महल’ शब्द का तात्पर्य है

A. केवल एक महल
B. एक राजस्व इकाई/गाँव या संपत्ति
C. एक कर संग्रहकर्ता का नाम
D. ब्रिटिश गवर्नर-जनरल
उत्तर: B. एक राजस्व इकाई/गाँव या संपत्ति।
व्याख्या: ‘महल’ राजस्व निर्धारण के लिए एक गाँव/संपत्ति (निपटान इकाई) को दर्शाता था।
प्रश्न 28. किस प्रणाली ने ज़मींदारों को वंशानुगत अधिकारों के साथ मालिक बना दिया?
A. रैयतवारी
B. महालवारी
C. स्थायी बंदोबस्त (ज़मींदारी)
D. जनजातीय प्रथागत काश्तकारी
उत्तर: C. स्थायी बंदोबस्त (ज़मींदारी)।
व्याख्या: स्थायी बंदोबस्त ने ज़मींदारों को वंशानुगत मालिकाना दर्जा प्रदान किया।
प्रश्न 29. 1860 के दशक में किस घटना ने ब्रिटेन को भारतीय कपास निर्यात को बढ़ावा दिया?
A. मद्रास में रैयतवारी की शुरुआत
B. अमेरिकी गृहयुद्ध
C. संथाल विद्रोह
D. स्थायी बंदोबस्त
उत्तर: B. अमेरिकी गृहयुद्ध।
व्याख्या: गृहयुद्ध ने अमेरिकी कपास निर्यात को कम कर दिया, जिससे भारतीय कपास की मांग (कपास मे उछाल) बढ़ गई।
प्रश्न 30. अध्याय में चर्चा किए गए पहाड़ी समुदायों में से कौन से समूह अक्सर सीमांत भूमि और जंगलों में रहते थे?
A. पहाड़िया और संथाल
B. मराठा और राजपूत
C. बंगाली और पंजाबी
D. ब्रिटिश बागान मालिक
उत्तर: A. पहाड़िया और संथाल।
व्याख्या: अध्याय में राजमहल पहाड़ियों में पहाड़िया और संथाल जैसे पहाड़ी समुदायों का वर्णन किया गया है।
प्रश्न 31. स्थायी बंदोबस्त सबसे पहले कहाँ लागू किया गया था?
A. बंगाल (बिहार और उड़ीसा सहित)
B. केवल मद्रास
C. केवल बॉम्बे
D. केवल पंजाब
उत्तर: A. बंगाल (बिहार और उड़ीसा सहित)।
व्याख्या: स्थायी बंदोबस्त बंगाल में शुरू हुआ और बिहार और उड़ीसा तक विस्तारित हुआ।
प्रश्न 32. औपनिवेशिक काल के दौरान ग्रामीण इलाकों में साहूकारों और व्यापारियों के रूप में किस वर्ग का प्रभाव बढ़ा?
A. केवल ब्रिटिश सिविल सेवक
B. महाजन/साहूकार और व्यापारी
C. केवल ग्राम प्रधान
D. आदिवासी ओझा
उत्तर: B. महाजन/साहूकार और व्यापारी।
व्याख्या: साहूकार (महाजन) और व्यापारी प्रमुख ऋण प्रदाता और स्थानीय सत्ता के दलाल बन गए।
प्रश्न 33. किस फसल की जबरन खेती कार्यक्रम के कारण बंगाल में ग्रामीण अशांति पैदा हुई?
A. चाय
B. नील
C. गन्ना
D. गेहूँ
उत्तर: B. नील।
व्याख्या: नील की खेती करने वालों के बलपूर्वक तरीकों के कारण 1859-60 का नील विद्रोह हुआ।
प्रश्न 34. उच्च भू-राजस्व मांगों के परिणामों के बारे में क्या सही है?
A. उन्होंने हमेशा कृषि निवेश को बढ़ावा दिया।
B. उन्होंने ऋणग्रस्तता और भूमि हस्तांतरण में योगदान दिया।
C. उन्होंने काश्तकारी को कम किया।
D. उन्होंने किसानों की आय में समान रूप से वृद्धि की।
उत्तर: B. उन्होंने ऋणग्रस्तता और भूमि हस्तांतरण में योगदान दिया।
व्याख्या: उच्च माँगों ने अक्सर किसानों को उधार लेने के लिए मजबूर किया, जिससे कर्ज और भूमि का नुकसान हुआ।
प्रश्न 35. स्थायी बंदोबस्त किस प्रशासनिक संहिता में शामिल था?
A. कॉर्नवॉलिस संहिता
B. बेंटिक संहिता
C. पिट्स इंडिया अधिनियम
D. 1773 का विनियमन अधिनियम
उत्तर: A. कॉर्नवॉलिस संहिता।
व्याख्या: स्थायी बंदोबस्त 1793 की कॉर्नवॉलिस संहिता का हिस्सा था।
प्रश्न 36. ‘ज़मींदार’ शब्द का मूल अर्थ था
A. कंपनी शासन के तहत राजस्व संग्रहकर्ता/ज़मींदार
B. ब्रिटिश सैनिक
C. केवल आदिवासी नेता
D. केवल साहूकार
उत्तर: A. कंपनी शासन के तहत राजस्व संग्रहकर्ता/ज़मींदार।
व्याख्या: ज़मींदार पारंपरिक रूप से राजस्व एकत्र करते थे; स्थायी बंदोबस्त के तहत वे मालिक बन गए।
प्रश्न 37. बंगाल में गांवों के अंदर कौन से किसान अक्सर मध्यस्थ के रूप में काम करते थे और सत्ता हासिल करते थे?
A. जोतदार
B. पहाड़िया
C. ब्रिटिश बागान मालिक
D. केवल रैयत
उत्तर: A. जोतदार।
व्याख्या: जोतदार – धनी किसान मालिक – स्थानीय शक्ति और प्रभाव प्राप्त करते थे।
प्रश्न 38. निम्नलिखित में से कौन सा दक्कन दंगों का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
A. असम में एक आदिवासी विद्रोह
B. 1875 में साहूकारों के खिलाफ एक किसान आंदोलन
C. केवल 1857 का सैन्य विद्रोह
D. बॉम्बे में कपड़ा श्रमिकों की हड़ताल
उत्तर: B. 1875 में साहूकारों के खिलाफ एक किसान आंदोलन।
व्याख्या: दक्कन दंगे 1875 (पूना/अहमदनगर) में साहूकार-विरोधी किसान दंगे थे।
प्रश्न 39. महालवारी बंदोबस्त के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
A. उन्होंने प्रत्येक रैयत को सभी राजस्व के लिए पूरी तरह से उत्तरदायी बनाया।
B. उन्होंने सामूहिक उत्तरदायित्व को गाँव/महल स्तर पर रखा।
C. इनका प्रयोग केवल मद्रास में किया गया।
D. उन्होंने ज़मींदारों को हर जगह से पूरी तरह से समाप्त कर दिया।
उत्तर: B. उन्होंने सामूहिक उत्तरदायित्व को गाँव/महल स्तर पर रखा।
व्याख्या: महालवारी ने सामूहिक उत्तरदायित्व को ग्राम इकाइयों (महलों) पर थोप दिया।
प्रश्न 40. कृषि के व्यावसायीकरण के साथ कौन सा सामाजिक परिवर्तन आया?
A. बाजार संबंधों का पूर्ण लोप
B. नकदी फसलों का उदय और बाजार मूल्यों पर निर्भरता
C. सभी किसानों को लाभान्वित करने वाले तत्काल भूमि सुधार
D. किसी भी किसान प्रतिरोध का अभाव
उत्तर: B. नकदी फसलों का उदय और बाजार मूल्यों पर निर्भरता।
व्याख्या: व्यावसायीकरण ने नकदी फसलों की खेती और बाजार पर निर्भरता को बढ़ा दिया, जिससे कभी-कभी अस्थिरता भी पैदा हुई।
41–50: अभिकथन-कारण (AR) प्रकार (एक सही विकल्प चुनें)
प्रत्येक AR के लिए विकल्प
A — A और R दोनों सत्य हैं और R, A की व्याख्या करता है
B – दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की व्याख्या नहीं करता है;
C — A सत्य R असत्य
D — A गलत R सही
प्रश्न 41. अभिकथन (A): स्थायी बंदोबस्त ने एक नए भूस्वामी वर्ग का निर्माण किया।
कारण (R): ज़मींदारों को भूमि पर वंशानुगत अधिकार और निश्चित राजस्व दायित्व दिए गए।
उत्तर: A.
व्याख्या: दोनों सत्य हैं; वंशानुगत अधिकार + निश्चित राजस्व ने ज़मींदारों को एक भूस्वामी वर्ग में बदल दिया।
प्रश्न 42. उत्तर: रैयतवारी ने किसानों को मालिकाना हक दिया।
उत्तर: रैयतवारी के तहत सरकार व्यक्तिगत किसानों से कर वसूलती थी।
उत्तर: उत्तर:
स्पष्टीकरण: दोनों सत्य हैं; प्रत्यक्ष बंदोबस्त ने किसानों को मालिकाना हक जैसे अधिकार प्रदान किए।
प्रश्न 43. A: महालवारी ने शुरुआत में राज्य की माँग को काफ़ी कम कर दिया था।
R: होल्ट मैकेंज़ी ने सभी क्षेत्रों में राज्य की माँग को 10% तक कम करने के लिए महालवारी की शुरुआत की।
उत्तर: D.
व्याख्या: A गलत है (महालवारी अक्सर ऊँची माँगों को तय करती थी); R गलत/गलत है – इसने माँग को समान रूप से 10% तक कम नहीं किया।
प्रश्न 44. उत्तर: संथाल विद्रोह 1855 में शुरू हुआ था।
उत्तर: इसका नेतृत्व सिद्धू और कान्हू मुर्मू ने किया था।
उत्तर: उत्तर:
स्पष्टीकरण: दोनों सत्य हैं; कारण नेतृत्व और तिथि की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 45. A: दक्कन के दंगों में साहूकारों पर हमले हुए।
R: बढ़ती ऋणग्रस्तता और ज़बरदस्ती ऋण देने की प्रथाओं ने किसानों को भड़का दिया।
उत्तर: A.
व्याख्या: दोनों सत्य हैं; कारण हमलों का कारण बताता है।
प्रश्न 46. A: बंगाल के कई गाँवों में जोतदारों ने ज़मींदारों की शक्ति को कमज़ोर कर दिया।
R: जोतदार स्थानीय रूप से रहने वाले और प्रभाव डालने वाले धनी किसान थे।
उत्तर: A.
व्याख्या: दोनों सत्य हैं; R बताता है कि कैसे जोतदारों ने ज़मींदारी नियंत्रण को कमज़ोर किया।
प्रश्न 47. A: नील की खेती करने वाले हमेशा किसानों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करते थे।
R: नील की खेती के लिए बागान मालिक आमतौर पर ज़बरदस्ती के अनुबंधों का इस्तेमाल करते थे।
उत्तर: C.
व्याख्या: A गलत है; R सही है – ज़बरदस्ती नील की खेती की विशेषता है।
प्रश्न 48. A: कृषि के व्यावसायीकरण ने ग्रामीण इलाकों से पलायन को कम किया।
R: नए बाज़ार अवसरों ने किसानों पर आर्थिक दबाव को सार्वभौमिक रूप से कम किया।
उत्तर: D.
व्याख्या: A गलत; R गलत/अतिसरलीकृत – व्यावसायीकरण ने अक्सर पलायन और विविध प्रभावों को बढ़ाया।
प्रश्न 49. A: स्थायी बंदोबस्त पूरे भारत में समान रूप से सफल रहा।
R: इस प्रणाली ने विविधताएँ पैदा कीं और कई जगहों पर किसानों को अक्सर नुकसान पहुँचाया।
उत्तर: C.
व्याख्या: A गलत है; R सही है लेकिन A का खंडन करता है।
प्रश्न 50. A: राजमहल पहाड़ियाँ संथालों और पहाड़ियों से जुड़ी हैं।**
R: इन पहाड़ी समुदायों के पास निर्वाह के अलग-अलग तरीके थे और वे बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करते थे।**
उत्तर: A.
व्याख्या: दोनों सत्य; R, A की व्याख्या करता है।
51–65: मिलान करो (Match the following) (प्रारूप: बायां—दायां)
प्रश्न 51. मिलान करें:
- स्थायी बंदोबस्त – (A) कॉर्नवालिस
- रयोतवारी — (B) थॉमस मुनरो
- महलवारी — (C) होल्ट मैकेंज़ी
- नील विद्रोह — (D) 1859–60
उत्तरः 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्याः कॉर्नवॉलिस = स्थायी बंदोबस्त (1793); मुनरो रैयतवाड़ी (मद्रास) से जुड़े थे; मैकेंज़ी ने महालवाड़ी की रचना की; नील विद्रोह 1859-60 में बंगाल में हुआ था।
प्रश्न 52. मिलान:
- सिद्धु और कान्हू – (A) संथाल नेता
- संथाल हुल — (B) 1855
- संथाल परगना – (C) विद्रोह के प्रति प्रशासनिक प्रतिक्रिया
- पहाड़िया – (D) राजमहल के निकट पहाड़ी समुदाय
उत्तरः 1–A, 2–B, 3–C, 4–D.
व्याख्याः सिद्धू और कान्हू ने संथाल हुल (1855) का नेतृत्व किया; राज्य ने बाद में संथाल परगना का गठन किया; पहाड़िया उसी क्षेत्र के पहाड़ी लोग थे।
प्रश्न 53. मिलान:
- जोतदार – (A) धनी कृषक/बड़े किसान मालिक
- ज़मींदार – (B) स्थायी बंदोबस्त के तहत मध्यस्थ
- रैयत – (C) व्यक्तिगत कृषक/किसान
- महल – (D) गांव/संपत्ति राजस्व इकाई
उत्तरः 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्याः जोतदार = अमीर स्थानीय कृषक; ज़मींदार = राजस्व मध्यस्थ/मालिक; रैयत = कृषक; महल = महालवाड़ी में मूल इकाई।
प्रश्न 54. मिलान:
- दक्कन दंगे (1875) — (A) ऋण बांडों को जलाना
- महाजन – (B) उच्च ब्याज पर ऋण प्रदान करता था
- पूना/अहमदनगर – (C) दक्कन अशांति का मुख्य क्षेत्र
- फसल की विफलता + उच्च ब्याज – (D) दंगों का तत्काल ट्रिगर
उत्तर: 1-A, 2-B 3-C, 4-D
व्याख्या: दक्कन दंगों में ऋण बांडों को नष्ट करना शामिल था; महाजन ऋण स्रोत थे; पूना/अहमदनगर प्रमुख जिले थे; ऋणग्रस्तता और विफलताओं ने अशांति को जन्म दिया।
प्रश्न 55. मिलान:
- अमेरिकी गृहयुद्ध (1861-65) – (A) भारत में कपास का उछाल
- नील उत्पीड़न – (B) बंगाल में किसान प्रतिरोध
- कपास की कीमत में गिरावट (तेजी के बाद) – (C) किसान ऋणग्रस्तता
- नील विद्रोह के नेता (जैसे, दिगंबर बिस्वास) – (D) स्थानीय नेता/संगठक
उत्तरः 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्याः अमेरिकी गृहयुद्ध ने भारतीय कपास की मांग पैदा की; नील की खेती ने नील विद्रोह को जन्म दिया; तेजी-मंदी के चक्र ने कर्ज को जन्म दिया; स्थानीय नेताओं ने प्रतिरोध का आयोजन किया।
प्रश्न 56. मिलान:
- कॉर्नवॉलिस कोड – (A) कंपनी सेवा का पुनर्गठन और स्थायी बंदोबस्त की शुरुआत
- बेंटिक – (B) 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में राजस्व/प्रशासन में सुधार और संशोधन
- होल्ट मैकेंज़ी – (C) महालवारी प्रणाली के समर्थक
- थॉमस मुनरो – (D) मद्रास में रैयतवाड़ी प्रशासक
उत्तरः 1-A, 2-B, 3-C 4-D
व्याख्याः कॉर्नवॉलिस संहिता में स्थायी बंदोबस्त शामिल था; बाद में बेंटिक ने नीतियों में संशोधन किया; मैकेंज़ी = महालवारी; मुनरो = मद्रास में रैयतवारी।
प्रश्न 57. मिलान:
- ‘दिकू’ – (A) आदिवासियों द्वारा शोषक बाहरी लोगों के लिए प्रयुक्त शब्द
- पहाड़ियों/जंगलों की ओर पलायन – (B) किसानों/जनजातियों द्वारा प्रतिरोध/पलायन का रूप
- खेती के लिए वन मंजूरी – (C) आदिवासी विस्थापन का कारण
- औपनिवेशिक वन कानून – (D) कानूनी साधन जो पारंपरिक अधिकारों को प्रतिबंधित करता था
उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्या: ‘दिकू’ शब्द बाहरी लोगों को दर्शाता था; कई लोग पहाड़ों पर चले गए; जंगलों की सफाई से जनजातियाँ विस्थापित हुईं; वन कानूनों ने प्रथागत अधिकारों में कटौती की।
प्रश्न 58. मिलान:
- नकदी फसल का व्यावसायीकरण – (A) बाजार पर निर्भरता में वृद्धि
- पारंपरिक निर्वाह खेती – (B) बाजार मूल्य अस्थिरता के प्रति कम जोखिम
- बाजार-संबद्ध ऋण – (C) साहूकारों और वाणिज्यिक लेनदारों की वृद्धि
- किरायेदार असुरक्षा – (D) भूमि हस्तांतरण जोखिम में वृद्धि
उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्या: व्यावसायीकरण ने किसानों को बाजारों और ऋण से बांध दिया, जिससे साहूकारों की भूमिका बढ़ गई और किरायेदारों की भेद्यता बढ़ गई।
प्रश्न 59. मिलान:
- महालवारी विशेषता – (A) ग्राम/महल मूल्यांकन और सामूहिक दायित्व
- रैयतवारी विशेषता – (B) व्यक्तिगत रैयतों के साथ प्रत्यक्ष बंदोबस्त
- स्थायी बंदोबस्त विशेषता – (C) वंशानुगत ज़मींदारी स्वामित्व
- संकर/संशोधित बस्तियाँ – (D) क्षेत्रों में भिन्नताएँ और स्थानीय अनुकूलन
उत्तर: 1A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्या: प्रत्येक बस्ती की अपनी विशिष्ट विशेषताएं थीं; बाद के प्रशासनों ने स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार प्रणालियों को अनुकूलित किया।
प्रश्न 60. मिलान:
- संथाल हुल की मांगें – (A) प्रथागत भूमि अधिकारों का संरक्षण
- अदालतों में किसानों की याचिकाएँ – (B) प्रतिरोध का कानूनी रूप
- किसान पलायन – (C) पलायन करके शोषण से बचें
- सशस्त्र विद्रोह – (D) खुला हिंसक प्रतिरोध
उत्तरः 1-A, 2-B 3-C, 4-D
व्याख्याः उत्पीड़न के प्रति प्रतिक्रियाएँ कानूनी याचिकाओं और प्रवास से लेकर संथाल हुल जैसे सशस्त्र विद्रोह तक फैली हुई थीं।
प्रश्न 61. मिलान:
- जोतदार की शक्ति का स्रोत – (A) खेती और स्थानीय ऋण पर नियंत्रण
- अनुपस्थित ज़मींदार प्रभाव – (B) स्थानीय एजेंटों और बिचौलियों पर निर्भरता
- व्यापारियों/कमीशन एजेंटों का उदय – (C) वाणिज्यिक संबंध जिन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आकार दिया
- फसल विशेषज्ञता (जैसे, नील, कपास) – (D) भूमि उपयोग और श्रम पैटर्न में बदलाव
उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्या: स्थानीय अभिजात वर्ग, अनुपस्थिति, बाजार एजेंट और फसल बदलाव ने गांवों में शक्ति और अर्थव्यवस्था को नया रूप दिया।
प्रश्न 62. मिलान:
- नील बागान मालिकों की सामान्य प्रथा – (A) किसानों पर नील की खेती थोपने के लिए बलपूर्वक अनुबंध
- नील कारखाना/मध्यस्थ – (B) नील एकत्र करना, रैयतों को अग्रिम ऋण देना
- विद्रोह के बाद कानूनी पूछताछ – (C) जांच और सुधार के लिए दबाव
- स्थायी वैकल्पिक फसलें (विद्रोह के बाद) – (D) नील से हटकर अन्य नकदी फसलों की ओर रुख
उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्या: बागान मालिकों ने बल प्रयोग किया; बिचौलियों और अग्रिमों ने किसानों को बांध दिया; विद्रोह के बाद जांच की गई और फसल पैटर्न बदल गया।
प्रश्न 63. मिलान:
- किसान ऋणग्रस्तता के कारण – (A) राजस्व मांग + फसल विफलता + महंगी लागत
- परिणाम: भूमि-हस्तांतरण – (B) ऋण चुकाने के लिए भूमि की बिक्री
- परिणाम: बंधुआ मजदूरी/दासता – (C) श्रम शोषण में वृद्धि
- राज्य प्रतिक्रिया (आंशिक) – (D) सीमित कानूनी/नियामक हस्तक्षेप
उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्या: उच्च मांग और बाजार के दबाव के कारण कर्ज, जमीन बेचना, कुछ मामलों में दासता और केवल सीमित राज्य सुधार हुए।
प्रश्न 64. मिलान:
- वे क्षेत्र जहाँ रैयतवारी का प्रयोग होता था – (A) मद्रास, बम्बई के कुछ भाग
- वे क्षेत्र जहाँ महालवारी का प्रयोग किया गया – (B) उत्तर-पश्चिमी प्रांत, पंजाब के कुछ भाग और मध्य भारत
- वे क्षेत्र जहाँ स्थायी बंदोबस्त का प्रयोग किया गया – (C) बंगाल, बिहार, उड़ीसा
- क्षेत्रीय परिणाम भिन्न-भिन्न – (D) प्रणाली के आधार पर विभिन्न सामाजिक/आर्थिक प्रभाव
उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
व्याख्या: निपटान प्रणालियों के विशिष्ट क्षेत्रीय पदचिह्न थे और उनके परिणाम अलग-अलग थे।
प्रश्न 65. मिलान:
- किसान प्रतिरोध के रूप – (A) कानूनी याचिकाएँ, पलायन, रोज़मर्रा की चोरी
- सामूहिक विद्रोह के रूप – (B) संथाल हुल, नील विद्रोह, दक्कन दंगे
- दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव – (C) नए अभिजात वर्ग (जोतदार), दृढ़ साहूकार
- अल्पकालिक प्रशासनिक प्रतिक्रिया – (D) विशेष जिलों, जांच आयोगों का निर्माण
उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C 4-D
व्याख्या: किसानों ने कानूनी से लेकर हिंसक तक कई तरह की रणनीति अपनाई; औपनिवेशिक राज्य ने कभी-कभी अल्पकालिक उपायों के रूप में प्रशासनिक परिवर्तन और आयोग बनाए; दीर्घकालिक पैटर्न ने नए अभिजात वर्ग को जन्म दिया।
66–72: केस-आधारित MCQ (छोटे अंश फिर प्रश्न)
परिच्छेद A (Q66-72):
1860 के दशक में कपास की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं क्योंकि अमेरिका से आपूर्ति बाधित हो गई थी। मध्य और पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में किसानों ने कपास की खेती का विस्तार किया। कुछ को लाभ हुआ; दूसरों ने खेती बढ़ाने के लिए ऋण लिया और बाद में कीमतों में गिरावट और कर्ज के बोझ तले दब गए।
प्रश्न 66. कपास की खेती में तेजी के बावजूद कुछ किसानों को परेशानी का सामना क्यों करना पड़ा?
A. उन्होंने कपास उगाने से इनकार कर दिया।
B. उन्होंने भारी कर्ज लिया और कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ा।
C. उनके पास दीर्घकालिक अनुबंधों की गारंटी थी।
D. उन्हें सोने में भुगतान किया गया।
उत्तर: B.
व्याख्या: खेती का विस्तार करने के लिए कर्ज लेने से किसान बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो गए।
प्रश्न 67. 1860 के दशक में कपास की तेजी मुख्य रूप से परिणामस्वरूप हुई
A. भारतीय स्वतंत्रता
B. अमेरिकी कपास का विघटन (गृहयुद्ध)
C. भारतीय कृषि का पूर्ण मशीनीकरण
D. स्थायी बंदोबस्त का अंत
उत्तर: B.
व्याख्या: अमेरिकी गृहयुद्ध ने अमेरिकी आपूर्ति को कम कर दिया, जिससे भारतीय कपास की मांग बढ़ गई।
प्रश्न 68. तेजी के दौरान किस तंत्र ने किसानों की भेद्यता को बढ़ाया?
A. केवल सहकारी ऋण तक आसान पहुंच
B. अनौपचारिक साहूकारों और अल्पकालिक ऋणों पर निर्भरता
C. फसलों के लिए राज्य समर्थित बीमा
D. कपास के लिए गारंटीकृत मूल्य सीमा
उत्तर: B.
व्याख्या: कठोर शर्तों वाले अनौपचारिक ऋण (साहूकारों) ने भेद्यता को बढ़ाया।
परिच्छेद ख (प्रश्न 69-72):
कई गाँवों में ज़मींदारों की स्थिति अनुपस्थित थी; स्थानीय सत्ता का प्रयोग जोतदारों या ग्राम प्रधानों द्वारा किया जाता था। किसान समूहों ने विभिन्न तरीकों से प्रतिरोध किया—कानूनी याचिकाएँ, पलायन, खुला विद्रोह।
प्रश्न 69. खुले विद्रोह के अलावा किसान प्रतिरोध का कौन सा सामान्य रूप था?
A. कानूनी याचिकाएँ दायर करना और बातचीत करना
B. ब्रिटिश संसद में औपचारिक सदस्यता
C. रातोंरात कारखाने स्थापित करना
D. नौसैनिक हमले शुरू करना
उत्तर: A.
व्याख्या: किसानों ने विद्रोह के साथ-साथ याचिकाएँ, पहाड़ियों की ओर पलायन और कभी-कभार कानूनी सहारा लिया।
प्रश्न 70. अनुपस्थित ज़मींदारों के कारण अक्सर निम्नलिखित परिणाम होते थे:
A. किरायेदारों के साथ दैनिक सीधा संपर्क
B. स्थानीय सत्ता-धारकों (जोतदारों) और बिचौलियों का उदय
C. किसानों के लिए तत्काल भूमि सुधार लाभदायक
D. किराया वसूली का पूर्ण रूप से गायब होना
उत्तर: B.
स्पष्टीकरण: अनुपस्थिति ने स्थानीय अभिजात वर्ग को गांव के मामलों पर वास्तविक नियंत्रण हासिल करने की अनुमति दी।
प्रश्न 71. पहाड़ियों की ओर पलायन (जैसे, पहाड़िया क्षेत्र) था
A. शोषणकारी दावों से बचने के लिए कुछ समूहों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक विधि
B. जमींदारों के लिए एक ब्रिटिश पुनर्वास कार्यक्रम
C. केवल एक मौसमी त्योहार
D. स्थायी बंदोबस्त की आधिकारिक नीति
उत्तर: A.
व्याख्या: कुछ किसान दमनकारी व्यवस्थाओं से बचने के लिए पहाड़ियों और जंगलों में भाग गए।
प्रश्न 72. विद्रोह के बाद औपनिवेशिक राज्य द्वारा इनमें से कौन सी कानूनी/प्रशासनिक प्रतिक्रिया है?
A. अलग प्रशासनिक जिलों का निर्माण (जैसे, संथाल परगना)
B. तत्काल स्वतंत्रता प्रदान करना
C. सभी किसानों को मुफ्त भूमि वितरण
D. सभी करों को समाप्त करना
उत्तर: A.
व्याख्या: राज्य ने कभी-कभी शांति/प्रशासन के लिए विशेष अधिकार क्षेत्र (जैसे, संथाल परगना) बनाए।
73–77: बहु-सही / दो-उत्तर वाले MCQ (सभी सही विकल्प चुनें)
(सभी लागू विकल्पों को चुनें; सही विकल्प तभी चुनें जब आप सभी सही विकल्प शामिल करें।)
प्रश्न 73. स्थायी बंदोबस्त की विशेषताओं का चयन करें:
A. राजकोष के लिए स्थायी रूप से निश्चित राजस्व
B. प्रत्येक रैयत के साथ सीधा बंदोबस्त
C. जमींदारों को वंशानुगत अधिकार
D. एक भूस्वामी मालिकाना वर्ग को प्रोत्साहित किया
उत्तर: A, C, D.
स्पष्टीकरण: स्थायी बंदोबस्त ने राजस्व तय किया और जमींदारों को वंशानुगत मालिक बनाया, जिससे एक भूस्वामी वर्ग का निर्माण हुआ; इसने रैयतों के साथ सीधा बंदोबस्त नहीं किया।
प्रश्न 74. कृषि के व्यावसायीकरण के प्रभाव चुनें:
A. नकदी फसलों (कपास, नील) में वृद्धि
B. बाजार पर निर्भरता में कमी
C. कुछ क्षेत्रों में किसानों का अधिक ऋणग्रस्त होना
D. स्थानीय साहूकारों का शक्तिशाली कर्ता के रूप में उभरना
उत्तर: A, C, D.
व्याख्या: व्यावसायीकरण ने नकदी फसलों को बढ़ावा दिया, ऋण जोखिम को बढ़ाया और साहूकारों को मजबूत किया।
प्रश्न 75. रैयतवाड़ी प्रणाली के बारे में सही कथन चुनें:
A. सरकार सीधे किसानों से निपटती थी
B. थॉमस मुनरो द्वारा मद्रास प्रेसीडेंसी में पेश किया गया
C. राजस्व के लिए सामूहिक ग्राम दायित्व लगाया गया
D. मद्रास और बॉम्बे और असम के कुछ हिस्सों में प्रचलित
उत्तर: A, B, D.
स्पष्टीकरण: रैयतवाड़ी = रैयतों (मुनरो) के साथ सीधा समझौता, मद्रास, बॉम्बे क्षेत्रों और कुछ अन्य में उपयोग किया जाता है; सामूहिक दायित्व महालवारी है।
प्रश्न 76. 19वीं सदी के ग्रामीण इलाकों में किसान अशांति से जुड़े आइटम चुनें:
A. नील उत्पीड़न और नील विद्रोह
B. ऋण दासता और दक्कन दंगे
C. संथाल हुल (1855) आदिवासी विद्रोह
D. कंपनी द्वारा सभी करों का तत्काल उन्मूलन
उत्तर: A, B, C.
व्याख्या: नील विद्रोह, दक्कन दंगे और संथाल हुल सभी ग्रामीण प्रतिरोध हैं; कंपनी ने करों को तुरंत समाप्त नहीं किया।
प्रश्न 77. शुरू की गई/संशोधित महालवारी प्रणाली की विशेषताओं का चयन करें:
A. गांव/महल स्तर का मूल्यांकन
B. होल्ट मैकेंज़ी (1822) द्वारा शुरू किया गया और बेंटिक/अन्य के तहत संशोधित किया गया
C. व्यक्तिगत कृषक हर जगह पूरी तरह से जिम्मेदार थे
D. कई क्षेत्रों में मूल्यांकन में वन और चारागाह शामिल थे
उत्तर: A, B, D.
स्पष्टीकरण: महालवारी गांव आधारित थी, जिसे होल्ट मैकेंज़ी द्वारा तैयार किया गया था, बाद में संशोधित किया गया; इसमें अक्सर विभिन्न प्रकार की भूमि शामिल होती थी।
78–82: उच्च-क्रम / अनुप्रयोग MCQ (विश्लेषण / परीक्षा-शैली)
प्रश्न 78. कौन सा संयोजन सबसे अच्छी तरह से बताता है कि औपनिवेशिक राजस्व प्रणालियों के तहत कई किसानों को भूमि क्यों खोनी पड़ी?
A. स्थायी निश्चित मांग + फसल विफलता + साहूकार ऋण
B. प्रचुर वर्षा + उच्च बचत + राज्य सब्सिडी
C. शून्य कराधान + किरायेदारों के लिए पूर्ण स्वामित्व अधिकार
D. केवल गांवों में औद्योगिक रोजगार
उत्तर: A.
व्याख्या: निश्चित मांग, अप्रत्याशित कृषि और ऋणग्रस्तता ने मिलकर भूमि की बिक्री और अलगाव को मजबूर किया।
प्रश्न 79. औपनिवेशिक भूमि राजस्व नीतियों का गाँव के सामाजिक संबंधों पर निम्नलिखित में से कौन सा दीर्घकालिक प्रभाव था?
A. हर जगह सांप्रदायिक भूमि स्वामित्व को मजबूत करना
B. स्थानीय असमानता में वृद्धि, नए अभिजात वर्ग (जोतदार) और सशक्त साहूकार
C. बिना किसी संघर्ष के तत्काल सामाजिक सद्भाव
D. ग्रामीण बाजारों का पूर्ण रूप से गायब होना
उत्तर: B.
व्याख्या: राजस्व नीतियों ने भूमि स्वामित्व के पैटर्न को बदल दिया, जिससे अक्सर असमानता बढ़ गई और नए स्थानीय अभिजात वर्ग और साहूकार पैदा हो गए।
प्रश्न 80. कौन से दो विकास सबसे अधिक निकटता से जुड़े हुए हैं: (i) उच्च राजस्व मांग, (ii) साहूकारों की वृद्धि, (iii) 1800 के दशक में सहकारी ऋण संस्थाओं का निर्माण?
A. (i) और (ii) निकटता से जुड़े हुए हैं।
B. (i) और (iii) निकटता से जुड़े हुए हैं।
C. (ii) और (iii) निकटता से जुड़े हुए हैं।
D. 1800 के दशक में तीनों समान रूप से जुड़े हुए हैं।
उत्तर: A.
व्याख्या: उच्च राजस्व मांग ने ऋणग्रस्तता को बढ़ावा दिया, जिससे साहूकारों की भूमिका का विस्तार हुआ; सहकारी समितियाँ बहुत बाद में आम हुईं।
प्रश्न 81. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अच्छे ढंग से बताता है कि संथाल विद्रोह में आदिवासी और किसान दोनों चरित्र क्यों थे?
A. इसने आदिवासी भूमि प्रथाओं की रक्षा करने और शोषक बाहरी लोगों (महाजनों, ज़मींदारों) को बाहर निकालने की मांग की।
B. यह केवल लंदन में ब्रिटिश व्यापार नीतियों के खिलाफ एक विद्रोह था।
C. इसने केवल संथाल परगना के औद्योगीकरण की मांग की।
D. यह भूमि से असंबद्ध एक धार्मिक आंदोलन था।
उत्तर: A.
व्याख्या: संथाल हुल ने भूमि/संस्कृति की रक्षा और साहूकारों/ज़मींदारों/ब्रिटिश एजेंटों द्वारा शोषण का विरोध करने की मांगों को मिला दिया।
प्रश्न 82. अध्याय 9 के विषय का सबसे सटीक एक-पंक्ति सारांश कौन सा है?
A. औपनिवेशिक नीतियों ने ग्रामीण इलाकों को बदल दिया – भू-राजस्व प्रणाली, व्यावसायीकरण और नए सामाजिक संबंध – जिससे विजेता और हारने वाले पैदा हुए और ग्रामीण प्रतिरोध लगातार हुए।
B. उपनिवेशवाद का भारतीय ग्रामीण इलाकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
C. यह अध्याय केवल ब्रिटिश सैन्य अभियानों के बारे में है।
D. यह अध्याय केवल शहरी औद्योगीकरण पर चर्चा करता है।
उत्तर: A.
व्याख्या: यह अध्याय इस बात पर केंद्रित है कि कैसे औपनिवेशिक शासन और राजस्व व्यवस्थाओं ने ग्रामीण भारत को बदल दिया, नए अभिजात वर्ग, ऋणग्रस्तता, बाजार संबंध और प्रतिरोध पैदा किए।






